अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

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निम्नलिखित पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विद्युत अधिनियम
  1. विद्युत अधिनियम, 2003 के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
  2. क्या विद्युत अधिनियम, 2003 का विस्तार संपूर्ण भारत तक कर दिया गया है?
  3. ''समर्पित पारेषण लाइन'' का क्या अर्थ है?
  4. ''वितरण लाइसेंसी'' का क्या अर्थ है?
  5. ''विद्युत प्रणालियाँ'' शब्द से क्या तात्पर्य है?
  6. ''क्षेत्रीय विद्युत समिति'' का क्या अर्थ है?
  7. ''स्टैण्ड-एलोन'' प्रणाली से आपका क्या तात्पर्य है?
  8. ''पारेषण लाइनों'' से आपका क्या तात्पर्य है?
  9. राष्ट्रीय विद्युत निधि और प्रशुल्क नीति योजना को कौन तैयार एवं प्रकाशित करेगा?
  10. कोई व्यक्ति विद्युत का पारेषण या वितरण या व्यवसाय किस प्रकार करता है?
  11. देश में विद्युत के पारेषण के लिए क्या नेटवर्क है?
  12. क्षेत्रीय भार प्रेषण केंद्र के क्या उत्तरदायित्व हैं?
  13. राज्य भर प्रेषण केंद्र के क्या उत्तरदायित्व हैं?
  14. विद्युत विधेयक, 2003 के लिए विद्युत अधिनियम, 2003 के अंतर्गत क्या विशेषताऍं उपलब्ध हैं?
 

विद्युत अधिनियम

प्रश्नः 1) विद्युत अधिनियम, 2003 के क्या उद्देश्य हैं?

उत्तर: निम्नलिखित उपायों के द्वारा विद्युत के उत्पादन, पारेषण, वितरण, व्यवसाय तथा उपयोग से संबंधित कानूनों को समेकित करने के लिए अधिनियम।

- विद्युत उद्योग के विकास हेतु सहायक उपाय करना।

- सभी उपयोगकर्ताओं को विद्युत की आपूर्ति।

- उपभोक्ता हित की सुरक्षा।

- ऊर्जा प्रशुल्क का परिमेयकरण।

- सब्सिडियों से संबंधित नीतियों में पारदर्शिता।

- केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए), विनियामक आयोगों द्वारा गठित दक्ष एवं पर्यावरणीय रूप से हितकर नीतियों तथा अपीलीय प्राधिकरण की स्थापना को प्रोत्साहन।

प्रश्नः 2) क्या विद्युत अधिनियम, 2003 का विस्तार संपूर्ण भारत तक कर दिया गया है?

उत्तरः जी हाँ, विद्युत अधिनियम, 2003 का विस्तार जम्मू एवं कश्मीर राज्य के सिवाय संपूर्ण भारत तक कर दिया गया है।

प्रश्नः 3)समर्पित पारेषण लाइन'' शब्द का क्या अर्थ है?

उत्तरः ''समर्पित पारेषण लाइन'' से तात्पर्य बिन्दु दर बिन्दु पारेषण के लिए किसी ऐसी विद्युत आपूर्ति लाइन से है जोकि विद्युत लाइनों या विद्युत संयंत्रों या उत्पादन स्टेशनों या किसी पारेषण लाइन या सब स्टेशन या उत्पादन स्टेशनों या भार केंद्र को जोड़ने के उद्देश्य के लिए पुनअपेक्षित है।

प्रश्नः 4) ''वितरण लाइसेंसी'' शब्द का क्या तात्पर्य है?

उत्तरः ''वितरण लाइसेंसी'' से तात्पर्य ऐसे लाइसेंसी से है जो अपने आपूर्ति के क्षेत्र में उपभोक्ताओं को विद्युत आपूर्ति हेतु वितरण प्रणाली के प्रचालन एवं अनुरक्षण के लिए प्राधिकृत है।

प्रश्नः 5) ''विद्युत प्रणालियाँ'' शब्द से क्या तात्पर्य है?

उत्तरः विद्युत के उत्पादन, पारेषण, वितरण एवं आपूर्ति से संबंधित सभी पहलू जिसमें एक या अधिक निम्नलिखित शामिल हैः-

- उत्पादन स्टेशन।

- पारेषण अथवा मुख्य पारेषण लाइनें।

- सब-स्टेशन।

- टाई-लाइनें-भार प्रेषण कार्य।

- प्रभुत्व और वितरण प्रभुत्व।

- विद्युत आपूर्ति लाइनें।

- ओवरहेड लाइनें।

- सेवा लाइनें।

- कार्य।
प्रश्नः 6) ''क्षेत्रीय विद्युत समिति'' का क्या कार्य है?

उत्तरः ''क्षेत्रीय विद्युत समिति'' की स्थापना उस क्षेत्र में विद्युत प्रणाली के एकीकृत प्रचालन को सुगम बनाने के लिए विनिर्दिष्ट क्षेत्र हेतु केंद्र सरकार द्वारा की जाती है।

प्रश्नः 7) ''स्टैण्ड एलोन प्रणाली'' से आपका क्या तात्पर्य है?

उत्तरः ''स्टैण्ड एलोन प्रणाली'' से तात्पर्य ग्रिड से जुड़े बिना विनिर्दिष्ट क्षेत्र में विद्युत के उत्पादन एवं वितरण् के लिए विद्युत प्रणाली की स्थापना से है।

प्रश्नः 8) ''पारेषण लाइनों'' से आपका क्या तात्पर्य है?

उत्तरः ''पारेषण लाइनों'' से तात्पर्य केबलों और ओवरहेड लाइनों के नियंत्रण तथा ऐसे में वन या उनका कोई भाग जिसमें ऐसे ट्रांसफार्मरों, स्विचगियर, को लाए जाने तथा अन्य कार्यों के लिए अपेक्षित है, के नियंत्रण के लिए आवश्यक तथा किसी स्टेप-अप तथा स्टेप-डाउन ट्रांसफार्मरों, स्विचगियर तथा अन्य कार्यों के साथ एक उत्पादन स्टेशन से दूसरे उत्पादन स्टेशन या सब स्टेशन से विद्युत ले जाने वाली सभी ऊंचे प्रेशर वाली केबलों तथा ओवरहेड लाइनों (जो कि लाइसेंसी की वितरण प्रणाली का एक अनिवार्य भाग नहीं है) से है।

प्रश्नः 9) राष्ट्रीय विद्युत नीति और प्रशुल्क नीति योजना को कौन तैयार एवं प्रकाशित करेगा?

उत्तरः केंद्र सरकार, समय-समय पर कोयला, प्राकृतिक गैस, न्यूक्लीयर पदार्थ अथवा सामग्री, जल एवं ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों जैसे संसाधनों के इष्टतम उपयोग के आधार पर विद्युत प्रणाली के विकास के लिए राज्य सरकारों और प्राधिकरण के परामर्श से राष्ट्रीय विद्युत नीति और प्रशुल्क नीति योजना तैयार एवं प्रकाशित करेगी।

प्रश्नः 10) कोई व्यक्ति विद्युत का पारेषण या वितरण का व्यवसाय किस प्रकार करता है?

उत्तरः किसी भी व्यक्ति को विद्युत के पारेषण या वितरण या व्यवसाय की अनुमति प्रदान की जा सकती है यदि उसके पास धारा-14 के अंतर्गत जारी किया गया प्राधिकृत लाइसेंस हो या धारा-13 के अंतर्गत छूट प्राप्त हो।

प्रश्नः 11) देश में विद्युत के पारेषण के लिए क्या नेटवर्क है?

उत्तरः केंद्र सरकार देश का क्षेत्रवार विभाजन करती है और समय-समय पर इसमें वह संशोधन करती है जो वह विद्युत के दक्ष, आर्थिक और एकीकृत पारेषण एवं आपूर्ति के लिए आवश्यक समझे।

- केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर एक केंद्र की स्थापना कर सकती है जिसे क्षेत्रीय भार प्रेषण केंद्रों के मध्य विद्युत के इष्टतम निर्धारण तथा प्रेषण हेतु राष्ट्रीय भार प्रेषण केंद्र के रूप् में जाना जाएगा।

- राष्ट्रीय भार प्रेषण केंद्र का प्रचालन केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किसी केंद्रीय अधिनियम के द्वारा अथवा उसे अंतर्गत् स्थापित अथवा गठित किसी सरकारी कंपनी या प्राधिकरण या निगम द्वारा किया जाएगा।

- केंद्र सरकार प्रत्येक क्षेत्र के लिए एक केंद्र स्थापित करेगी जिसे क्षेत्रीय भार प्रेषण केंद्र के रूप में जाना जाएगा। इसकी अधिकार-क्षेत्र वह होगा जो इस भाग के अंतर्गत शक्तियों के प्रयोग तथा कार्यों के निर्वहन के उद्देश्य हेतु केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किया जाए।

- राज्य पारेषण लाइनों के किसी पारेषण लाइसेंसी या राज्य अथवा राज्य की किसी उत्पादन कंपनी (अंतराज्यीय पारेषण प्रणाली से संबंधित के अतिरिक्त) या सब स्टेशन के किसी अन्य लाइसेंसी को क्षेत्रीय भार प्रेषण केंद्रों द्वारा जारी किए जाने वाले सभी आदेश राज्य भार प्रेषण केंद्र के माध्यम से जारी किए जाएंगे।

प्रश्नः 12) क्षेत्रीय भार प्रेषण केंद्र के क्या उत्तरदायित्व है?

उत्तरः क्षेत्रीय भार प्रेषण केंद्र निम्नलिखित हेतु उत्तरदायी होगाः-

- क्षेत्र में प्रचालनरत लाइसेंसियों और उत्पादन कंपनियों के साथ हस्ताक्षरित अनुबंधों के अनुसार क्षेत्र के भीतर विद्युत के इष्टतम निर्धारण तथा प्रेषण के लिए उत्तरदायी होगा।

- ग्रिड प्रचालनों की निगरानी करेगा।

- क्षेत्रीय ग्रिड के माध्यम से पारेषित विद्युत की मात्रा का लेखा-जोखा रखेगा।

- अन्तर्राज्यीय पारेषण प्रणाली का निरीक्षण एवं नियंत्रण करेगा।

- ग्रिड मानकों और ग्रिड केंद्र के अनुसार क्षेत्रीय ग्रिड के सुरक्षित एवं अर्थव्यवस्थापूर्ण प्रचालन के माध्यम से क्षेत्र के भीतर ग्रिड नियंत्रण एवं विद्युत के प्रेषण के लिए वास्तविक समय के परिचालन हेतु उत्तरदायी होगा।

प्रश्नः 13) राज्य भार प्रेषण केंद्र के क्या उत्तरदायित्व हैं?

उत्तरः राज्य भार प्रेषण केंद्रः

- राज्य भार प्रेषण केंद्र राज्य में विद्युत प्रणाली के एकीकृत प्रचालन को सुनिश्चित करने के लिए सर्वोच्च निकाय होगा।

- उस राज्य में प्रचालनरत लाइसेंसियों अथवा उत्पादन कंपनियों के साथ किए गए करारों के अनुसार राज्य के भीतर विद्युत के इष्टतम निर्धारण तथा विद्युत के प्रेषण हेतु उत्तरदायी होगा।

- ग्रिड प्रचालनों की निगरानी करेगा।

- राज्य ग्रिड के माध्यम से पारेषित विद्युत की मात्रा का लेखा-जोखा रखेगा।

- अन्तर्राज्यीय पारेषण प्रणाली का निरीक्षण करेगा एवं नियंत्रण रखेगा।

- ग्रिड मानकों और राज्य ग्रिड कोड के अनुसार राज्य ग्रिड के सुरक्षित एवं अर्थव्यवस्थापूर्ण प्रचालन के माध्यम से राज्य के भीतर ग्रिड नियंत्रण एवं विद्युत के प्रेषण हेतु वास्तविक समय के प्रचालन हेतु उत्तरदायी होगा।

प्रश्नः 14) विद्युत विधेयक, 2003 के लिए विद्युत अधिनियम, 2003 के अंतर्गत क्या विशेषताएं उपलब्ध हैं?

उत्तरः विद्युत विधेयक, 2003 के लिए विद्युत अधिनियम, 2003 के अंतर्गत निम्नलिखित विशेषताएं हैः-

- केंद्र सरकार राज्य सरकारों के परामर्श से राष्ट्रीय विद्युत नीति तैयार करेगी।

- ग्रामीण विद्युतीकरण को पूरा करने पर बल दिया जाएगा और पंचायतों, सहकारी समितियों, गैर सरकारी संगठनों, फ्रेचाइजियों आदि द्वारा ग्रामीण वितरण के प्रबंधन की व्यवस्था की जाएगी।

- उत्पादन को निलाइसेंसीकृत तथा कैप्टिव उत्पादन की निःशुल्क अनुमति देते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में लाइसेंस मुक्त उत्पादन एवं वितरण का प्रावधान किया जाएगा।

- जल परियोजनाओं के लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण से स्वीकृति की आवश्यकता होगी।

- केंद्र तथा राज्य स्तर पर पारेषण यूटिलिटि पारेषण नेटवर्क के आयोजित एवं समन्वित विकास के उत्तरदायित्व के साथ एक सरकारी कंपनी होगी।

- पारेषण में निजी लाइसेंसी तथा स्वतंत्र नेटवर्क के माध्यम से वितरण में प्रवेश के लिए प्रावधान।

- आरंभ से ही पारेषण में खुली पहुँच होगी।

- वितरण में खुली पहुँच को चरणों में शुरू किया जाएगा। क्रास सब्सिडी के वर्तमान स्तर के लिए सरचार्ज को क्रास सब्सिडियों तथा आपूर्ति के दायित्व के साथ धीरे-धीरे चरणबद्ध किया जाएगा। राज्य विद्युत विनियामक आयोग खुली पहुँच की चरणबद्धता के संबंध में एक वर्ष के भीतर विनियम निर्धारित करेंगे।

- वितरण लाइसेंसी उत्पादन को शुरू करने के लिए स्वतंत्र होंगे और उत्पादन कंपनियाँ वितरण लाइसेंसियों को लेने के लिए स्वतंत्र होंगे।

- राज्य विद्युत विनियामक आयोग एक अनिवार्य आवश्यकता है।

- बजट के माध्यम से सब्सिडी के भुगतान का प्रावधान।

- व्यवसाय, जो कि एक पृथक गतिविधि है, को यदि आवश्यक हो तो व्यावसायिक सीमा पर उच्चतम सीमा निर्धारित करने के लिए प्राधिकृत करते हुए विनियामक आयोगों की सूरक्षा के साथ मान्यता प्रदान की जा रही है।

- राज्य विद्युत बोर्डों के पुनर्गठन या निरंतरता का प्रावधान।

- आपूर्ति की गई समस्त विद्युत को अनिवार्य बना दिया गया है।

- केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग और राज्य विद्युत विनियामक आयोग के निर्णय के विरूद्ध की गई अपीलों की सुनवाई के लिए एक अपीलीय ट्रिब्यूनल है।

- केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग और राज्य विद्युत विनियामक आयोग के निर्णय के विरूद्ध की गई अपीलों की सुनवाई के लिए एक अपीलीय ट्रिब्यूनल है।

- बिजली की चोरी से संबंधित प्रावधानों को और सख्त बना दिया गया है।