पारेषण अवलोकन

Printer-friendly version
 
भारत में विद्युत क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। चालू वर्ष 2018-19 (30 सितम्बर, 2018 तक) के दौरान, पीक मांग लगभग 175.5 गीगावाट है और ताप (64.3%), जल (13.2%), नवीकरणीय (20.5%) तथा परमाणु (2.0%) ऊर्जा के उत्पादन के साथ स्थापित क्षमता संयुक्त रूप से 344.7 गीगावाट है।
 
भारत में बिजली उत्पादन के लिए प्राकृतिक संसाधन असमान रूप से फैले हुए हैं और कुछ क्षेत्रों में केंद्रित हैं। ट्रांसमिशन, बिजली वितरण मूल्य श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण तत्व, जेनरेटिंग स्टेशनों से विद्युत की निकासी और लोड वितरण केंद्रों तक इसके वितरण की सुविधा प्रदान करता है। अभाव वाले क्षेत्रों में बिजली के कुशल वितरण के लिए, ट्रांसमिशन सिस्टम नेटवर्क को मजबूत करने, अंतर्राज्‍यीय पावर ट्रांसमिशन सिस्टम को बढ़ाने और राष्ट्रीय ग्रिड आवर्धन और ट्रांसमिशन सिस्टम नेटवर्क में वृद्धि की आवश्यकता है। विभिन्न विद्युत उत्पादन स्टेशनों द्वारा उत्पादित बिजली निकालने और उपभोक्ताओं को वितरित करने के लिए गत वर्षों में ट्रांसमिशन लाइनों का एक व्यापक नेटवर्क विकसित किया गया है। नाममात्र अतिरिक्त उच्च वोल्टेज की लाइनें जो कि प्रचलन में हैं, वह ± 800 केवी एचवीडीसी और 765 केवी, 400 केवी, 230/220 केवी, 110 केवी और 66 केवी एसी लाइनें हैं।
 
30 सितम्बर, 2018 तक देश में 220 केवी और उससे अधिक वोल्टेज स्तर की पारेषण प्रणाली की क्षमता 4,00,902 सीकेएम ट्रांसमिशन लाइनों की थी और सबस्टेशनों की बिजली को परिणत करने की क्षमता 8,58,908 एमवीए की थी। इसके अलावा, 30 सितम्बर, 2018 तक, अंतर-क्षेत्रीय लिंक की कुल पारेषण क्षमता 86,450 मेगावाट है।
 
वोल्टेज स्थिरता, कोणीय स्थिरता, लूप प्रवाह, लोड प्रवाह स्वरुप और ग्रिड सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, ट्रांसमिशन लाइनों को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) / केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (सीईआरसी) / राज्य विद्युत विनियामक आयोग (एसईआरसी) के विनियम / मानकों के अनुसार संचालित किया जाता है।
 
पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पावरग्रिड) एक सीपीएसयू है जो ट्रांसमिशन सेक्टर की देखभाल करता है। इसे 23 अक्टूबर, 1989 को 5,000 करोड़ रुपये की अधिकृत शेयर पूंजी के साथ  (जिसे कि वित्त वर्ष 2007-08 में बढ़ाकर 10,000 करोड़ रूपए कर दिया गया) एक सार्वजनिक लिमिटेड कंपनी के रूप में, जिसका पूर्ण स्वामित्व भारत सरकार है; निगमित किया गया था। पावरग्रिड ने अगस्त 1991 से प्रबंधन आधार पर काम करना शुरू कर दिया और 1992-93 के दौरान चरणबद्ध तरीके से एनटीपीसी, एनएचपीसी, नीपको और अन्य केंद्रीय / संयुक्त क्षेत्र संगठनों से ट्रांसमिशन परिसंपत्तियों को संभाल लिया। अपने मैंडेट के अनुसार, निगम, केंद्रीय क्षेत्र की विद्युत निकासी के लिए संचरण प्रणाली प्रदान करने के अलावा, स्वस्थ वाणिज्यिक सिद्धांतों के आधार पर क्षेत्रीय और राष्ट्रीय ऊर्जा ग्रिड की स्थापना और उनके संचालन के लिए भी जिम्मेदार है ताकि विश्वसनीयता, सुरक्षा और अल्पव्यय के साथ क्षेत्रों के भीतर और उनके बीच आपस में बिजली हस्तांतरण की सुविधा मिल सके।